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कितना सच्चा है अवैध कोयला खनन पर बाबुल सुप्रियो का हमला ….. ?

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देर आए दुरुस्त आए तो नहीं कहूँगा लेकिन इतना कहूँगा कि देर से ही सही आए तो। जी हाँ मैं आसनसोल लोकसभा के सांसद सह भारी उद्योग मंत्री बाबुल सुप्रियो की बात कर रहा हूँ । प0 बंगाल कोयलाञ्चल में कोई तो ऐसा नेता है जो लगातार कोयला चोरों पर हमलावर है। अब देखना है कि यह हमला चुनाव तक ही रह जाता है या उसके बाद भी जारी रहता है।

वर्ष 2011 का चुनाव प्रचार जिन्हें याद होगा उन्हें यह भी याद होगा कि कोयलाञ्चल का अवैध कोयला खनन उस वक्त तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख एजेंडे में शामिल था । इस क्षेत्र के लगभग हर चुनावी सभा में अवैध कोयला खनन का मुद्दा उठता था और तत्कालीन वाममोर्चा सरकार पर अवैध कोयला खनन को प्रश्रय देने का आरोप लगाया जाता था। ये बात अलग है कि वही वाममोर्चा के भूतपूर्व सांसद वंश गोपाल चौधरी अब इस सरकार पर अवैध कोयला खनन को प्रश्रय देने का आरोप लगा रहे हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया वह था आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट का गठन इसी के साथ हावड़ा पुलिस कमिश्नरेट का भी गठन वर्ष 2011 में किया गया था। बाद में चार और पुलिस कमिश्नरेट बिधाननगर, बैरकपुर, सिलीगुड़ी, चन्दन नगर का गठन किया गया।

प0 बंगाल  पहले से ही एक शांतिपूर्ण राज्य माना जाता रहा है। पूरे देश में प0 बंगाल की छवि एक शांतिप्रिय राज्य के रूप में रही थी हालांकि अब छवि थोड़ी मलिन हुयी है लेकिन बाकियों से बेहतर ही कही जाएगी । आसनसोल-दुर्गापुर कमिश्नरेट बनने से यहाँ के कानून व्यवस्था में जबर्दस्त परिवर्तन आया था। पहली बार ऐसा लगा था कि  केवल एक शीर्ष अधिकारी ईमानदारी से काम करना चाहे तो अपने नीचे की पूरी व्यवस्था को बदल सकता है।  तत्कालीन पुलिस आयुक्त अजय कुमार नन्द के नेतृत्व में कोयला उत्खनन पूरी तरह से बंद हो गया था।  दुर्गापुर के एक तत्कालीन युवा एसीपी ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा था कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे समय में यहाँ पोस्टेड हैं जब प0 बंगाल में इतिहास रचा जा रहा है,  यहाँ अवैध कोयला  उत्खनन बंद हो रहा है।

प0 बंगाल से बंद हो गया था ये कहना गलत होगा क्योंकि उस वक्त भी पुरुलिया और बांकुड़ा में अवैध खनन जारी था जो अब भी जारी है । उसकी बात बाद में करेंगे फिलहाल बात हो रही है आसनसोल-दुर्गापुर कमिश्नरेट की तो यहाँ पर अवैध कोयला उत्खनन बंद हो गया था ।  लेकिन उसके साथ यह बात भी उभरने लगी थी कि इस क्षेत्र के ज़्यादातर कल-कारखाने बंद हो रहे हैं, व्यवसाय मंदा पड़ गया है,  कारण अवैध कोयला उत्खनन बंद हैं।

बाराबनी में जिस कोयले के छोटे से ढेर के सामने में वो पुलिस अधिकारी से सवाल कर रहे थे, वे पुलिस अधिकारी तो मन ही मन खुश हो रहे होंगे कि चलो अच्छा है कि बाबुल सुप्रियो इसी  छोटे से ढेर को कोयला चोरी समझ रहे हैं। जिस छोटे से कोयला के ढेर को दिखाकर बाबुल सुप्रियो कोयला चोर भगाने का ढोले पीट रहे थे न उसे अङ्ग्रेज़ी में “टिप ऑफ आइसबर्ग ” भी नहीं कहते हैं उसे  “ए पॉइंट ऑन टिप ऑफ आइसबर्ग” कहते हैं।

मैं बात कर रहा था उस वक्त कल कारखानों के बंद होने की खबरों पर। खबर तो ये फैल गयी थी कि बाजारों की रौनक चली गयी है। दूकानदारी मंद हो गयी है। एक आईएएस अधिकारी , जो  इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण पद पर थी  , उन्होने मुझसे पूछा था कि  क्या ये सच है कि अवैध कोयला खनन बंद होने से इस क्षेत्र के व्यवसाय पर असर पड़ा है।

मैं यहाँ पर आसनसोल के तत्कालीन एसीपी सुनील कुमार यादव का वक्तव्य जरूर रखना चाहूँगा जो उन्होने मंडे मॉर्निंग को दिये एक विशेष साक्षात्कार में  कहा था  कि काफी लोग मानते हैं  कि अवैध कोयला खनन में बेरोजगारों को काम मिलता है। बाजार में पैसा आता है और व्यवसाय बढ़ता है लेकिन यह पूरी तरह से गलत है।  जितना कोयला ये माफिया लूटते हैं वो यदि सरकारी तरीके से खनन किया जाये तो उससे ज्यादा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार को जो रायल्टी मिलेगी उससे बेरोजगारों के लिए बेहतर अवसर उत्पन्न किए जाएँगे। इस अवैध उत्खनन से मात्र कुछ लोग अमीर हो रहे हैं और ज्यादातर लोग गरीब रह जाते हैं।

खैर ! जैसे -तैसे करके तृणमूल कांग्रेस के पहले कार्यकाल में कम से आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में किसी बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन की खबर नहीं आई। बांकुड़ा, पुरुलिया की  बात नहीं कर रहा, वहाँ तो बंद ही नहीं हुई थी।  लेकिन उनका अवैध उत्पादन बूरी तरह से प्रभावित जरूर हुआ था क्योंकि अवैध कोयलों के बड़े हिस्से का  खपत तो इसी  क्षेत्र में ही होना था और यहाँ की सख्ती के कारण  माल खप नहीं रहा था।

वर्ष 2016 के चुनाव में रानीगंज और जामुड़िया विधानसभा तृणमूल हार गयी । जीती कौन  ?  माकपा  !  इस हार की बड़ी वजह इन क्षेत्रों के अवैध कोयला खनन के बंद होने को माना गया। अवैध उत्खनन बंद होने से बाजार मंदी, कारखाने बंदी की बातें तो पहले से ही थी अब चुनाव भी हार जाने से इन बातों को काफी बल मिला और शायद एक संदेश ऊपर तक गया कि अवैध उत्खनन जरूरी है।

फिर क्या था अवैध कोयला खदानों से गुलजार होने लगा कोयलांचल। वाम जमाने में अवैध उत्खनन छोटे-छोटे कुएं के माध्यम से बहुत ही गोपनीय तरीके से होता था लेकिन अब तो सीधे बड़ी-बड़ी मशीनें  लगा कर ऊपर से ही खोदकर ओसीपी के तर्ज पर अवैध उत्खनन शुरू हो गया । जिन्हें चिल्लाने की आदत थी वे चिल्लाते रह गए , अब उनकी कोई  सुनने वाला  नहीं था  ।  इस बीच मुख्यमंत्री ने कई बार हिदायत दी कि अवैध कोयला खनन बंद करना होगा , सिंडीकेट बंद करना होगा , लेकिन न अवैध कोयला खनन बंद हुआ और न सिंडीकेट ।

आलम यह है कि ईसीएल के मुख्य सुरक्षा अधिकारी को बयान जारी करना पड़ गया कि ईसीएल की संपत्ति सुरक्षित करने में राज्य सरकार कोई सहयोग नहीं कर रही है। लेकिन क्या वास्तव में एक केंद्र सरकार का कोई प्रतिष्ठान इतना बेबस हो सकता है और यदि हो सकता है तो यही बयान केंद्र सरकार के कोयला मंत्री के तरफ से आना चाहिए और यह देश के लिए एक संवैधानिक संकट होगा। यह चुनावी मुद्दा तो है ही लेकिन उससे भी अधिक यह संसद का मुद्दा है, संसदीय व्यवस्था का मुद्दा है। केवल चुनाव के समय गाना गाकर बाबुल सुप्रियो स्वयं चौकीदार साबित नहीं कर सकते हैं। यही मुद्दा  उन्हें संसद में उठाना चाहिए था , यह आम जनता की संपत्ति से जुड़ा मुद्दा है, मात्र राजनीति का मुद्दा नहीं है।

उन्हें संसद में उठाना चाहिए था कि किस प्रकार रानीगंज, बांकुड़ा , पुरुलिया  अवैध कोयला खनन का केंद्र बना हुआ है। बांकुड़ा के मेजिया, सालतोड़ा, अर्धग्राम का मुद्दा उन्हें संसद में उठाना चाहिए था क्योंकि वे केवल आसनसोल के सांसद ही नहीं थे वे देश के केंद्रीय मंत्री थे।  जो मुद्दा संसद में उठाने लायक था उसे एक गाना बनाकर वे चुनाव में उठाकर उसकी अहमियत को कम कर रहे हैं।

अधिसूचना जारी होने के कुछ दिन बाद ही कोलकाता की विशेष पुलिस ने बांकुड़ा से विस्फोटकों का जखीरा बरामद किया था। क्या वे विस्फोटक प0 बंगाल में धमाके करने के लिए लाये गए थे । नहीं इन विस्फोटकों का इस्तेमाल अवैध कोयला खदानों में होता है और ये पहली बार नहीं लाये गए थे इससे पहले भी कई बार जब्त हुये हैं, जिस तरह से अवैध कोयले जब्त होते रहते हैं  और जैसा कि ज़्यादातर मामलो में केवल माल जब्त होता है अपराधी नहीं । वो भी जब्त इसलिए होता है कि कुछ फाइलों में दर्ज करना होता है। फाइलों की मजबूरी न रहे तो वह भी जब्त न हो ।

इस खबर के प्रायोजक हैं : Bengal Press - Asansol

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Last updated: अप्रैल 25th, 2019 by Pankaj Chandravancee

Pankaj Chandravancee Pankaj Chandravancee
Chief Editor (Monday Morning)
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