टोल के नाम पर वसूली जाती है रंगदारी , पक्ष और विपक्ष सभी मौन

टोल के नाम पर वसूली जाती है रंगदारी

वर्तमान केंद्र एवं राज्य सरकार के अच्छे दिनों के कथन पर करारा जूता मारते हुए गिरिडीह जिले के बगोदर स्थित “घंघरी टोल प्लाजा” मानो पंथ प्रधान सेवक मोदी जी के सुशासन के वादों को चीरहरण कर रहा हैं । यें सारा वाकया भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सड़क मार्ग यातायात में मेरुदंड कहे जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 जीटी रोड में स्थित घंघरी टोल प्लाजा में हों रहा हैं । टोल प्लाजा के हालात से तो ऐसा लगता हैं मानों यहाँ टोल टैक्स नहीं गुंडा टैक्स वसूला जा रहा हैं। यह टोल प्लाजा आये दिन रंगदारी, मारपीट, छेड़खानी का प्रयास, रहागीरों पर जानलेवा हमले, छिनतय के लिए पूरे देश में सुर्खियों में हैं ।

प्रतिदिन मालवाहक वाहनों से करोड़ों की अवैध वसूली फर्जी स्लिप देकर टोल राशि से दुगनी राशि वसूल करना, मना करने पर ट्रक ड्राइवरों पर जानलेवा हमला करना, प्रतिदिन टोल प्लाजा में अवैध वसूली के कारण जीटी रोड पर जाम लगना जिससे ट्रांसपोर्टरों ट्रक मालिकों को लाखों का नुकसान ,आम जनता विद्यार्थियों ,आपातकालीन चिकित्सा सेवा को टोल में जाम के कारण प्रतिदिन भारी परेशानी उठानी पड़ती हैं।
अबतक टोल प्लाजा के अव्यवस्था के कारण दर्जनों बेगुनाह लोग अपाहिज हों चुके हैं या अपनी जान गंवा चुके हैं ।
और यें सारा कार्यक्रम प्रशासन के आला अधिकारियों के संरक्षण से लगातार 6 सालों से चल रहा है जिसकी हिस्सेदारी सभी हुक्मरानों कों छुटभैया नेताओं को पद के हिसाब से मिलता है ।

हर रोज करोड़ों की अवैध कमाई होती है इस टोल प्लाज़ा से

अब मैं आप लोगों को टोल प्लाजा के अवैध रूप के संचालन के एवज में घंघरी ग्राम सभा को मिल रहे करोड़ों रुपए के वारे न्यारे से आप लोगों को परिचय करवाना चाहता हूँ । टोल प्लाजा सिस्टम से चले वैधानिक तरीके से यहाँ हर काम कायदे कानून से हो तो किसी को कोई आपत्ति नहीं है और अच्छी बात हैं कि टोल प्लाजा से सैकड़ों ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलता रहेगा । टोल प्लाजा के आय से अर्जित धन का सदुपयोग हो , टोल प्लाजा से जो घंघरी ग्राम सभा को करोड़ों की आमदनी हो रहीं हैं उस पैसा का उपयोग घंघरी के गरीब गुरबों के जीवन स्तर में सुधार हो। लेकिन यहाँ तो माजरा ही कुछ और ही हैं । कहने को तो घंघरी ग्राम सभा का प्रबन्धन सर्वहारा वर्ग की राजनीतिक करने वालों के हाथ में है लेकिन पैसे की बेतहाशा आमदनी ने सर्वहारा को विशेष वर्ग में तब्दील कर दिया है। घंघरी टोल प्लाजा और घंघरी ग्राम सभा के ऊपर पूर्ण नियंत्रण एक संघठीत गिरोह के पास है जो अपने हिसाब से अपने राजनीतिक हित के लिए घंघरी के युवाओं के कंधों पर बंदूक रखकर इस्तेमाल कर रहे हैं । अगर टोल प्लाजा से बेतहाशा आमदनी के पैसे का उपयोग घंघरी और आस-पास के गाँव के युवाओं के शैक्षणिक स्तर सुधार में किया जाता , बेबस मजदूर किसान भाइयों के आर्थिक मदद के लिए किया जाता, किसी गरीब बेसहारा बीमार बच्चों के मदद के लिए किया जाता तो मैं समझता कि टोल से जो आमदनी हो रही है उसका सदुपयोग हो रहा है ।

पक्ष और विपक्ष सभी मौन

भारत के सबसे अव्यवस्थापूर्ण इस टोल प्लाजा के खिलाफ आजतक बगोदर विधानसभा एवं कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के सत्ता पक्ष व विपक्ष के किसी भी नेता ने आज तक कोई निर्णायक आंदोलन नहीं किया । इतने लंबे समय से इस अवस्था पर माननीय संसद श्री रविंद्र राय एवं माननीय विधायक श्री नागेन्द्र महतो जी की चुप्पी कई सवाल छोड़ जाते? इन नेताओं के साथ-साथ टोल प्रकरण में सत्ता पक्ष और विपक्ष का टोल प्लाजा में मैत्री पूर्ण जुगलबंदी देखने को मिलती है। कहने को तो भाकपा माले के कॉमरेडों ने सड़क से लेकर सदन तक सरकार के विरोध में संघर्ष का ठेका ले रखा है लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल प्लाजा में पूरी तरह से अवैध एवं अव्यवस्थापूर्ण सरकारी सिस्टम का प्रबंधन भाकपा माले की स्थानीय कमेटी करती हैं । इन सबों के साथ-साथ झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी सारा नंगा नाच देखकर भी कभी मुँह खोलने की जुगत नहीं की।

टोल प्लाजा के कर्मचारी की विधवा को उचित मुआवजा नहीं मिला

जब कहीं कोई आदमी सड़क दुर्घटना या किसी और घटना में किसी तरह से पीड़ित प्रभावित होता है या किसी का देहांत हों जाता हैं तो भाकपा माले के लोग सरकार से लाखों रुपए का मांग करते हैं और मैं उस मांग का पूर्ण रूप से समर्थन करता हूँ लेकिन घंघरी गाँव के ही हेमलाल महतो जो कि टोल प्लाजा का काम करने के दौरान टोल प्लाजा के बैरियर में दब के मर गए और उनके पीड़ित प्रभावित परिवार को सिर्फ और सिर्फ पचास हजार का भीख टोल प्लाजा प्रबन्धन की ओर से दिया गया जबकि इस टोल प्लाजा से प्रतिदिन वहाँ के छुट भैया हजारों की अवैध कमाई करते हैं । महीने में लाखों रुपए घंघरी ग्राम सभा को टोल प्लाजा प्रबन्धन देता हैं। करीब एक सप्ताह पूर्व होली के दिन हेमलाल महतो की विधवा का भी देहांत हों गया । अब हेमलाल महतो के बच्चें बिल्कुल ही अनाथ हैं ऐसे में इंसानियत और मानवता के लिए घंघरी ग्राम सभा के द्वारा करोड़ों के कोष में से छोटी सी राशि इन अनाथ बच्चों का भविष्य के लिए दिया जायेगा या फिर उन रुपयों का इस्तमाल सिर्फ ओर सिर्फ राजनीतिक हित साधने के लिए किया जायेगा।

भाकपा माले लालधन महतो पर राजनीति करती है पर उनकी विधवा की कोई सुध नहीं

स्वर्गीय लालधन महतो जिनके आदम कदम प्रतिमा के सामने घांघरी टोल प्लाजा से करोड़ों की कमाई करते हैं यें वहीं लालधन महतो हैं जो संघर्ष के राह में चलकर पुलिस के गोली का शिकार हो गए । भाकपा माले के कॉमरेड हर साल 4 अप्रैल को इनके शहादत दिवस के नाम पर अपनी राजनीतिक साख मजबूत करती हैं। लेकिन दुर्भाग्य देखिए स्वर्गीय लालधन महतो की विधवा बेवा 2 जून की रोटी के लिए रोज बेको से मजदूरी करने के लिए बगोदर जाती है । जबकि टोल प्लाजा से प्रतिदिन 150 लोगों का पेमैंट बिना काम किए मिलता हैं तो उसमें से एक हाजरी की हक्कदार स्वर्गीय लालधन महतो की विधवा नहीं थी ? आखिर क्यों लालधन महतो की बेवा को पेट पालने के लिए रोज 15 km दूर जाना पड़ता हैं? इस पर सर्वहारा की राजनीति करने वाले किसी भी नेता का इंसानियत मर क्यों जाता हैं । स्वर्गीय लालधन महतो की आत्मा रोती होगी यह देखकर यह सोच कर की मैंने तो राजनीति का शिकार होकर अपनी जान गँवा दी लेकिन आज मेरी लाश पर राजनीति करने वाले कम से कम मेरी विधवा बेवा बेसहारा का थोड़ा सा तो फिक्र कर लेते ।

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Last updated: मार्च 7th, 2018 by News Desk Monday Morning
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