बालमजदूरी हटाओ

भारत में बालमजदूरी एक सामाजिक आर्थिक समस्या है,और इसके मूल में गरीबी है। भारत में 37.2 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं, जो जीवन की मूल आवश्यकताओं से भी वंचित हैं। हमारे देश में गुलामों की कोई निश्चित गणना नही है। सरकार को गुलामी को निर्मूल करने के लिए कोई रास्ता निकालने चाहिए जैसे कि हर देश ने गुलामी बन्द करने के लिए कानून बनाये हैं।

ग्यारह लाख बच्चे भारत की सड़कों पर रहते हैं

ताजा वैश्विक सूचकांक सर्वे के अनुसार तीस लाख लोग पूरी दुनिया में दास बने हुए हैं और इनमें से भी आधे से अधिक लोग भारत मे हैं। सम्पूर्ण विश्व में बाल मजदूरी बाल शोषण का सबसे प्रचलित प्रकार है। संख्या के अनुसार संसार के तीस लाख सड़क पर रहने वाले बच्चों में से ग्यारह लाख बच्चे भारत की सड़कों पर रहते हैं। दासता की समस्या बेरीज़गारी और सामाजिक असुरक्षा की भावना से भी जुड़ी है। हमारे देश में गुलामों की गणना नहीं होती है।

भारत सरकार का अंदाज़ा है कि 12लाख से भी अधिक बालमज़दूर हैं

बच्चे ईश्वर का उपहार हैं और वे पूरी जनसंख्या का 36% हैं। यह राष्ट्रीय शर्म की बात है कि उनका बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी जबरदस्ती करवाई जा रही मजदूरी और सब ओर फैली अशिक्षा के कारण कुपोषण, गरीबी, बीमारी क्रूरता और शोषण से ग्रसित है। सब ओर फैले बाल शोषण का सबसे प्रचलित प्रकार बालमजदूरी ही है। बालमजदूरी अभी भी कुछ स्थानों में प्रचलित है जहाँ स्कूल छोड़ने की उम्र बहुत निम्न है। भारत सरकार का अंदाज़ा है कि 12लाख से भी अधिक बालमज़दूर हैं।

जनसँख्या नियंत्रण भी आवश्यक है

बाल मजदूरी को समाप्त करने के लिए समर्पित नागरिकों की जरूरत है जो इसकी जड़ पर प्रहार कर सकें। गरीबी का मुख्य कारण अधिक जनसंख्या है और राष्ट्रीय आय बढ़ती हुई जनसंख्या के बीच अंतर बनाये रखने में असफल सिद्ध हुई है। जनसंख्या न केवल अनेक बुराइयों जैसे अपराध और भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा देती है बल्कि सामाजिक बुराइयों जैसे बालमज़दूरी,अशिक्षा और स्वास्थ्य ज्ञान की कमी के अलावा घरेलू हिंसा, तलाक़ भी समाज में बढ़ते जा रहे हैं।

गरीबी हटाने के साथ ही शिक्षा में सुधार होने चाहिए

आज़ादी के बाद कुछ नई योजनाएं बच्चों के जीवन स्तर को उठाने के लिए प्रारम्भ की गई हैं फिर भी गरीबी हटाने के साथ ही शिक्षा में सुधार होने चाहिए। सबके लिए मुफ्त रुचिकर रोज़गारपरक शिक्षा बालमजदूरी को दूर कर सकती है। सरकार बालमजदूरी को हटाने में वैसा ही अहम रोल निभा सकती है जैसे कि अन्य देशों में बालमजदूरी को प्रतिबंधित कर के किया गया है। एक क्रमबद्ध और ईमानदार कदम बहुत जरूरी है यदि हम एक दासता मुक्त देश चाहते हैं। देश का भविष्य नौजवानों के हाथ मे है ,उनका अभ्युदय देश का अभ्युदय होगा।

Last updated: दिसम्बर 14th, 2017 by Jiban Majumdar

Jiban Majumdar
Columnist from Pune (Maharashtra) Active in generating Social Awareness campaign
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