सोशल मीडिया के लत के शिकार तो नहीं हो गए हैं ?

सोशल मीडिया के लत के शिकार हो रहे हैं युवा

सोशल मीडिया वर्तमान समय में हर वर्ग के लोगों का जरुरत बन गया है।
समय के साथ इसका इस्तेमाल और दायरा भी बढ़ता जा रहा है.
सोशल मीडिया के उपयोग में कोई बुराई नहीं है लेकिन इसकी देखरेख भी आवश्यक है.
इसके उपयोग के लिए समय का निर्धारण होना बहुत जरुरी है,
क्योंकि इस पर अच्छे और बुरे दोनों तरह की जानकारियां उपलब्ध रहती हैं.

जानकारी देने के साथ-साथ सोशल मीडिया युवाओं को भ्रमित भी कर रहा है

वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रयोग ने युवाओं को समय से पहले जागरूक के साथ ही आक्रांत भी कर दिया है.
वर्तमान युवा जल्द पहचान बनाना चाहते है और बिना इंतजार किए प्रतिष्ठित होना चाहते है,
जब उनकी यह चाहत पूरी नहीं होती तो वे आक्रामक हो जाते है और आपराधिक कार्यों में लिप्त होने लगते है.
ऐसे में यह देखा जाता है कि सोशल मीडिया के फायदे तो बहुत हैं, लेकिन इससे युवा वर्ग दिग्भ्रमित भी हो रहे है.

धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाले बयान और अश्लील तस्वीरों पर पाबंदी होनी आवश्यक है

इस पर प्रभावी अंकुश के लिए कठोर कानून बनाकर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.
सोशल मीडिया पर अच्छी जानकारियाँ व चीजें परोसने से युवाओं में आपराधिक प्रवृत्ति रुकेगी
सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट से आज की युवा पीढ़ी को बचाना अति आवश्यक हो गया है.
दरअसल मानव की प्रवृत्ति अनुकरणात्मक होती है, समाज में जैसा परोसा जाएगा वैसा ही लोग अनुसरण करेंगे.

सूचना प्रौद्योगिकी का यह युग बच्चों के मानसिक विकास में गहरा असर डाल रहा है

कई अभिभावक इस बात से चिंतत हैं कि प्रौद्योगिकी के संबंध में बच्चों का विकास कैसे प्रभावित हो सकता है?
हम जानते हैं कि हमारे किशोर एक आश्चर्यजनक गति से नए सामाजिक और संज्ञानात्मक कौशल का लाभ उठा रहे हैं,
लेकिन किशोरावस्था तेजी से विकास की समान रूप से महत्वपूर्ण अवधि है,
हम में से बहुत कम ध्यान दे रहे हैं कि कैसे हमारे किशोर प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हैं.
पिता के आईफोन के साथ खेलते हुए कम उम्र की तुलना में ज्यादा गहन और अंतरंग विषय उन्हें प्रभावित कर रहे है,
वास्तव में विशेषज्ञों को चिंता है कि सोशल मीडिया और पाठ संदेश जो कि किशोरावस्था के अभिन्न अंग बन गए हैं, वे किशोरों में चिंता पैदा कर रहे हैं और आत्मसम्मान को कम कर रहे हैं.

क्या है सोशल मीडिया ?

सोशल मीडिया किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, सिस्टम, वेबसाइट या ऐप को संदर्भित करता है,
यह लोगों को सामग्री बनाने और साझा करने में सक्षम बनाता है, और एक-दूसरे के साथ जुड़ना आसान करता है.
वर्तमान में फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सऐप, लिंक्ड-इन, यु-ट्यूब सबसे लोकप्रिय सोशल साइटें हैं,
एक मुफ्त साइट जहां पंजीकृत उपयोगकर्ता चित्र, लिंक, वीडियो, और अन्य सामग्री को अपने दोस्तों के साथ साझा कर सकते हैं.

साझा करने में सावधानी बरतें

कुछ भी साझा करने से पहले नियमों को जान लें और यह भी सुनिश्चित कर लें कि उसे कौन देख सकता है।
ज्यादातर समय आपके द्वारा साझा किए गए किसी भी चीज को केवल उन लोगों द्वारा देखा जाएगा जिन्हें आपने ‘मित्र’ बनाया है.
फेसबुक ने नियमित रूप से गोपनीयता सेटिंग बदलता रहता है  इसलिए उनकी सेटिंग्स और नीतियों के साथ-साथ अद्यतित रहना महत्वपूर्ण है.

सोशल मीडिया किशोरों को अपने दोस्तों के संपर्क में रहने का एक आसान रास्ता है

जैसे स्कूल के बाद बस स्टॉप पर फोन करना या फोन पर चैट करना.
यह आधुनिक दुनिया में सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.

सोशल मीडिया के नकारात्मक पहलू से अनजान रहते हैं युवा

इन सोशल साइटों के कुछ लाभ तो कुछ हानि भी है।
जिससे किशोर वर्ग अनभिग्य रहते है और ज्यादातर अपना नुकसान कर बैठते है.

ऑनलाइन वातावरण में कुछ नया सीखने की ललक ही सोशल साइट्स से जोड़ती है

सोशल मीडिया ने आज के युवाओं को पहले से ज्यादा स्वच्छंद बना दिया है
सोशल मीडिया ने आज के युवाओं को पहले से ज्यादा स्वच्छंद बना दिया है

सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों के साथ जुड़कर आज का युवा बेहतर सामाजिक कौशल विकसित कर सकता है,
अकेलेपन की समस्या से छुटकारा मिलता है।
नए सांस्कृतिक , सामाजिक विचारों और मुद्दों के बारे में जानकारी हासिल होती है ,
अपने दोस्तों के साथ जुड़े रहना, रचनात्मक दोस्तों के साथ अपने विचार साझा करना,
समाज में सक्रिय नागरिक बनने के लिए बेहतर सुसज्जित होना जैसे कई फायदे हैं।
वास्तविक दुनिया में कौशल विकसित करने के लिए उन्हें और अधिक स्वतंत्र मिलती है,

इसी के साथ ही सोशल मीडिया जोखिम भरा भी है

सोशल मिडिया पर बहुत ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने से वास्तविक दुनिया से दूर होने का खतरा बढ़ जाता है,
ऑनलाइन बदमाशी का शिकार होना, आपके ऑनलाइन प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचना,
आपकी निजी जानकारी ऑनलाइन साझा होना, किसी द्वारा परेशान किया जाना आदि नुकसान शामिल है.
एक अध्ययन के अनुसार सोशल साइट्स पर सिगरेट व शराब पीते हुए तस्वीर देखकर युवा खुद भी इन आदतों को अपनाने लगते है,

सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल आपको भुलक्कड़ बना सकता है

सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल आपकी याद्दाश्त पर भी असर करता है।
जिससे आप धीरे धीरे भुलक्कड होने लगते है.

साइबर बुलिंग एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है

साइबर बुलिंग यानि गंदी भाषा, तस्वीरों या धमकियों से इंटरनेट पर तंग करने का मामला भी काफी बढ़ा है.

कानून की मदद या निजी स्तर पर प्रयास करके साइबर बुलिंग से निपटा जा सकता हैं

यदि किसी फोरम पर कोई आपको तंग कर रहा है, तो उस फोरम से निकल जाए और अगर फिर भी आपको तंग किया जाए तो फेसबुक को रिपोर्ट करें. हालांकि फेसबुक इस पर कोई कार्यवाही नही करती है.

अगर धमकी मिले तो इस पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए

अगर पुलिस एक्शन न ले तो सीधे वकील के जरिए केस दायर किया जा सकता है.
हालाँकि सेक्शन 509 कहता है कि शब्द या गतिविधि या संकेत अगर महिलाओं की मॉडेस्टी को भंग करता है तो इसके खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है.

सेक्शन 66 ए का क्लाज बी बुलिंग के लिए सटीक बैठता है

ये बुलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्दों पर भी लागू होता है.
क्योंकि महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपराध है.
सेक्शन 66 ए का क्लाज बी बुलिंग के लिए सटीक बैठता है.
ये कानून इंटरनेट से जुड़े कानूनों का हिस्सा है. इनमें तीन साल तक की सजा होती है.
कई बार पुलिस को इन कानूनों के बारे में पता नहीं होता है.ऐसे में प्रिंटआउट लेकर जाएं और उन्हें दिखाएं

भारतीय कानून बच्चों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने में हो रहा विफल

आज के संदर्भ में भारतीय कानून बच्चों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह से विफल है.
बच्चों की सुरक्षा न तो भारतीय कानून का उद्देश्य है, और न ही इस बाबत कोई विशिष्ठ प्रावधान किये गए हैं.
साइबर बुलिंग का शिकार बनने वाले बच्चों को कड़ी सजा होनी चाहिए ।
साइबर बुलिंग करने वालों में इस बात का डर पैदा हो कि इसके परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं.
वैसे कई देशों में साइबर बुलिंग से बच्चों को बचाने के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था है।
भारत में साइबर बुलिंग से निपटने के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं है.

सोशल मीडिया किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल रहा है

आजकल के किशोर पूरे समय सोशल मीडिया पर रहते हैं।
जिसकी वजह से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने से डिप्रेशन, चिंता, नींद में कमी,
बातचीत करने में परेशानी होना जैसी समस्या हो जाती है.

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नशे के लत से भी बड़ी लत है सोशल मीडिया

सोशल मीडिया की लत के शिकार हो रहे हैं युवा
सोशल मीडिया की लत के शिकार हो रहे हैं युवा

किशोर किसी भी काम को करने के लिए ज्यादातर सोशल साइट पर निर्भर रहते हैं.
जिसका प्रभाव धीरे-धीरे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगते हैं.
उन्हें इसकी लत इतनी ज्यादा लग जाती है कि वह हर थोड़ी देर बाद इन साइट को चेक करते रहते हैं.
आज माता-पिता अपने बच्चों के सोशल साइट्स इस्तेमाल को लेकर काफी गंभीर दिखते है,
लेकिन उन्हें इसकी सटीक जानकारी नहीं होती है कि इस पर क्या किया जाना उचित होगा !
तो ऐसे में आपके बच्चे जो भी कर रहे है, उनके व्यवहार और उनकी भलाई के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है,

अपने बच्चों के व्यवहार में हो रहे बदलाव पर नजर रखें

यदि आप उनमें बड़े बदलाव देखें और ऑफलाइन जीवन के लिए उनके ऊर्जा स्तर और उत्साह,
सामान्य बातचीत में उनका व्यवहार, समय, खेल, होमवर्क और अन्य शौक जैसे अन्य गतिविधियों पर ध्यान दें.
फिर सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में उनसे बात करना उचित होगा.
ऑन-लाइन गेम भी किशोरों पर काफी प्रभाव बनाता जा रहा है.

Last updated: अक्टूबर 4th, 2017 by News Desk

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