दृष्टिहीन सीसीटीवी और अंधकारमय हाई मास्क लाइट डीबुडीह चेकपोस्ट की सोभा

आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट समेत झारखण्ड-बंगाल बॉर्डर की संवेदनशील डीबुडीह चेक पर सुरक्षा की दृष्टिकोण से लगाई गई सीसीटीवी कैमरा दृष्टिहीन तो, हाई मास्क लाइट सोभा की वस्तु बन चुकी है। चेक पोस्ट के पास ही पुलिस द्वारा बनाई गई वॉच टॉवर से दो सीसीटीवी कैमरा संचालित होती है। एक आसनसोल से धनबाद जाने वाली मार्ग की तो दूसरा आसनसोल जाने वाली मार्ग निगेहबानी करती है। किंतु विडंबना यह है कि एक कैमरा महीनों से खराब है। अलबत्ता अंधेरा होने के बाद दूसरा कैमरा भी दृष्टिहीन हो जाती है। राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था में तैनात कुल्टी ट्रैफिक के सिविक जवानों का कहना है कि विगत 15 दिनों से हाई मास्क लाइट खराब है। आला अधिकारियों को निरंतर शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस है।

झारखण्ड से बंगाल को जोड़ने वाली पुल क्षतिग्रस्त होने से विगत छह माह से यातायात बाधित है। ऐसे में दूसरे पुल से ही सभी वाहनों का आवागमन होती है। जिसे पुनः चेकपोस्ट पर मार्ग बदलना पड़ता है। ऐसे में यहाँ चार मार्ग है। एक कल्याणेश्वरी कि और दूसरा बराकर तीसरा (राजमार्ग) धनबाद तो चौथ कोलकाता की ओर जाती है। ऐसे में रात ढ़लते ही यहाँ अंधेरा हो जाने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

पुलिस को होटलो और दुकानों में लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की मदद लेनी पड़ती है अपराधियों की पहचान कई लिए

चेकपोस्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरे का स्क्रीन

दूसरी ओर पिछले दिनों चर्चित रही तेजपाल अपहरण कांड से भी पुलिस ने सीख नहीं ली फलस्वरूप आज यहाँ लगाई गई कैमरे भी भगवान भरोसे है। वॉच टावर पर लगाई गई दो कैमरों में एक खराब है। जबकि दूसरी ओर निर्वाचन आयोग द्वारा मार्ग पर लगाई गई एक कैमरा लॉटरी की दुकान के पास से संचालित होती है। पास की ही प्राथमिक विद्यालय से चार सीसीटीवी कैमरा संचालित होती है।

रात में अंधकारमय हो जाता है डिबुडीह चेकपोस्ट

ट्रैफिक सिविक जवानों ने बताया कि इसका सीधा प्रसारण आसनसोल कन्ट्रोल रूम में होता है। किंतु घटना घटने पर पुलिस अधिकारी वॉच टावर की सीसीटीवी फुटेज को ही खंगालते है। किंतु आश्चर्य की बात यह है कि कोई भी कैमरा चेक पोस्ट चौराहा के करीब नहीं है। विगत तीन दिन पूर्व लेफ्ट बैंक कॉलोनी में अनुज सिंह नामक युवक से बाइकर्स द्वारा की गई मोबाइल छिनतई के बाद पुलिस को एक निजी होटल में लगे सीसीटीवी कैमरा से तो अपराधियों की धुँधली अक्स तो मिली किंतु पदचिन्हों के सहारे डीबुडीह चेक पोस्ट पहुँचते ही व्यवस्था की पोल खुल गयी अलबत्ता पुलिस को खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

वसूली के लिए सीसीटीवी और हाई मास्क को कर दिया जाता है खराब

स्थानीय लोगों की माने तो डीबुडीह चेक पोस्ट पर अस्थायी रूप से आसनसोल पुलिस लाइन से तैनात जवानों एवं ट्रैफिक जवानों द्वारा वसूली के कारण सीसीटीवी और हाई मास्क को खराब कर दिया जाता है, ताकि अमन और चैन के साथ वसूली किया जा सके। संध्या 8 बजते ही अपने आरामगाह से जवान निकल पड़ते है। और धनबाद की ओर जाने वाली मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक के ही दो बैरिकेट लगाकर जमकर वसूली की जाती है। ऐसे में एक ब्रिज खराब हो जाने से यहाँ के जवानों की इन दिनों चांदी हो गयी है। सभी वाहन अब एक पुल से ही आवागमन करती है। पूरे प्रकरण सबसे महत्त्वपूर्ण आरोप यह है कि पहले सेल टैक्स कार्यालय के समीप ही वसूली की जाती थी, अलबत्ता इस कारण ब्रिज पर रात भर वाहनों की लंबी कतार लगी रहती थी। लोग ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के लिए वसूली को ही सबसे बड़ी वजह मानते है। ऐसे में आज झारखण्ड से बंगाल को जोड़ने के लिए एक मात्र लाइफ लाइन ब्रिज सलामत है। ऐसे में वसूली के कारण इस दूसरे पुल की भी अस्तित्व आज खतरे में है। अगर समय रहते ही इसे रोक नहीं गया तो हमेशा के लिए राजमार्ग संख्या दो पर झारखण्ड से बंगाल का संपर्क टूट जाएगा। पूरे प्रकरण में यू तो चेक पोस्ट पर लगी सीसीटीवी कैमरों में नाही इनकी तस्वीर कैद होती है और न ही विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की जाती है। ऐसे में उन्हें तांडव करने के लिए सीसीटीवी कैमरा और हाई मास्क लाइट खराब ही रहना उचित है।

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Last updated: मई 10th, 2019 by Guljar Khan