क्या सुपर फ्लॉप साबित हुआ इमरान खान का मोदी प्रेम ……. ?

इमरान खान ने उस वक्त पूरी दुनिया को चौंका दिया जब उन्होंने कहा कि मोदी के दोबारा सत्ता में आने से भारत-पाकिस्तान शांति वार्ता को बढ़ावा मिलेगा।

यह ठीक वैसा ही था जैसे कोई बिल्ली अचानक से शाकाहारी हो गयी है।

जैसी प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, हुआ भी ठीक  वही । उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर पूछा कि जरा सोंचिए कि इमरान खान ने यही बात अगर राहुल गाँधी के लिए कही होती तो चौकीदार हैंडल क्या प्रतिक्रिया दे रहे होते ।

महबूबा मुफ़्ती ने भी ठीक इसी अंदाज में ट्वीट किया कि भक्त अपना सर खुजा रहे हैं कि इमरान खान की प्रशंसा करें या नहीं।

अरविंद केजरीवाल ने भी मौके का फायदा उठाने की पूरी कोशिश की ओर पूरे ज़ोर-शोर से चिल्लाया कि ये देखो जी मोदी और इमरान मिले हुये हैं। ये बात अलग है कि किसी ने उनकी सुनी नहीं। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को जम्मू-कश्मीर के बाहर भारत में कोई गंभीरता से लेता नहीं।

बाकी विपक्षी नेता दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है वाली स्थिति में फंसे रहे और ज्यादा कुछ बोल नहीं पाये ।

कुल मिलाकर देखें तो इमरान खान का मोदी प्रेम का नाटक सुपर फ्लॉप हो गया । जिस उद्देश्य से उसने जाल फेंका था वह कामयाब नहीं हुआ।

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के सभी विपक्षी पार्टियों की तरह पाकिस्तानी भी चाहते हैं कि किसी तरह से मोदी सत्ता से हटें। जिस तरह से यहाँ के विपक्षी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री बाद में चुन लेंगे पहले मोदी को हटाओ, उसी प्रकार पाकिस्तानी भी चाहते हैं कि भारत का प्रधानमंत्री कोई भी हो पहले मोदी को हटाओ। पाकिस्तान पर मोदी डर का आलम ये है कि अभी भी उसे एयर स्ट्राइक का डर सता रहा है। उसे तो भारत का ऐसा प्रधान मंत्री चाहिए जो हर आतंकी हमले के बाद केवल कड़ी निंदा करे और ज्यादा नाराज हो तो कुछ दिनों के लिए क्रिकेट खेलना बंद कर दे ।

परमाणु हमले की घुड़कियाँ देने के बाद भी मोदी एयर स्ट्राइक कर देगा ये पाकिस्तान ने सपने में भी नहीं सोंचा था । हमला किया सो अलग, “मोस्ट फेवर्ड नेशन” का दर्जा छीन कर ढुलमुलाते पाकिस्तान को कड़ी ठोकर मार दी। इस बार कड़ी निंदा करके केवल क्रिकेट बंद करने की बात नहीं कि जैसा पहले होता था।

पानी रोकने का ऐलान कर दिया सो अलग, हालांकि ये पानी रोकना नहीं है। अपने हिस्से का पानी जो भारत छोड़ देता था उसे रोकने की बात है। तकनीकी रूप से इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी और इसे पूरा होने में भी कम से कम सात-आठ साल लगेंगे। फिर भी अब तक अतिरिक्त पानी का जो लाभ पाकिस्तान ले रहा था वो जरूर बंद हो जाएगा।

पाकिस्तान में फैला कट्टरपंथ मोदी को मुसलमानों के दुश्मन के रूप में देखता है, जम्मू कश्मीर में आतंकियों के सफाये को मुसलमानों पर जुल्म बता कर वहाँ की राजनीति चलती है।

जो घोषणा पत्र कॉंग्रेस ने जारी किए हैं और विपक्षी जैसा बयान दे रहे हैं इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि मोदी सत्ता से हटते हैं तो कश्मीर में सेना की कार्यवाही रुक जाएगी। आतंकियों का सफाया रुक जाएगा।

कश्मीरी पंडितों की वापसी उनके एजेंडे में नहीं है। सेना के अधिकार कम करने के लिए आफ़स्पा हटाना उनका एजेंडा है। पाकिस्तान भी बिल्कुल यही चाहता है। पाकिस्तान की कट्टरपंथी ताक़तें यही चाहती है कि कश्मीरी पंडितों की वापसी न हो। सेना उनके भेजे आतंकी को कोई नुकसान न पहुँचाए। जम्मू कश्मीर में इस्लामिक स्टेट के काले झंडे लहराएँ ।

जब  दुनिया के  ज़्यादातर राजनीतिक पंडित यह मानकर बैठे हैं कि मोदी दोबारा सत्ता प्राप्त कर लेंगे ऐसे में पाकिस्तान के लिए मोदी विरोध में ज्यादा दिन तक खड़े रहना उनके देश की छवि को और भी खराब कर रहा है।

पाकिस्तान के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण देश सऊदी अरब जिसके प्रिंस की गाड़ी खुद इमरान खान ने ड्राइव की, ने मोदी को अपने देश का सर्वश्रेष्ठ सम्मान दे दिया। रूस ने भी चुनावी माहौल में ही मोदी के लिए अपने देश के सर्वोच्च सम्मान की घोषणा कर दी। दुनिया के कई देश पहले ही उन्हें अपने देश में सम्मानित कर चुकी है।

इन सबके बीच इमरान खान का मोदी प्रेम छलकना ज़्यादातर लोगों को लग सकता है कि इमरान खान दबाव में हैं । अपने बिगड़ते आर्थिक हालात कि वजह से वह मोदी का समर्थन कर रहे हैं ।

लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। यह इमरान खान का मोदी के खिलाफ अंतिम हथियार है जिसमें निशाना लग गया तो भी ठीक और न लगा तो भी ठीक। इमरान खान को उम्मीद रही होगी कि उनके मोदी प्रेम से भारत की राजनीति में भूचाल आ जाएगा। पाकिस्तान नफरत की बुनियाद पर टिकी मोदी की लोकप्रियता में कमी आएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कुछेक को छोडकर भारत के ज्यादतर नेताओं ने मुद्दे पर नपी तुली प्रतिक्रिया ही दी । मीडिया में भी यह मुद्दा बहुत अधिक उछल नहीं पाया। कुल मिलाकर कहें तो इमरान खान का दांव सुपर फ्लॉप रहा।

दूसरी ओर यदि यह दांव फेल रहा तब भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश तो चला ही गया कि इमरान खान भी बाकी देशों के तरह ही मोदी को अपने हित में मानते हैं, वे सीमा पर शांति बहाली चाहते हैं, टकराव नहीं चाहते हैं।

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Last updated: अप्रैल 17th, 2019 by Pankaj Chandravancee

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