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कोयला तस्करी के लिए वैद्य लाइसेंस, लागत से इतने कम में कैसे होता था कोयले का उत्खनन एवं ट्रांसपोर्टिंग जाँच में जुटी सीबीआई

रानीगंज । इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के अंतर्गत चलने वाली सीबीआई के छापामारी के बाद से बंद नॉर्थ सियार सोल कोलियरी ओसीपी फेज-4 खोली गई और कोयले का उत्पादन शुरू की गई है, लेकिन कार्यरत ठेकेदार अभी से ही पैसों पैस में हैं। मात्र 15 से 20 ट्रक लगभग 500 टन कोयले का उत्पादन मात्र हो रही है। जबकि यहाँ से उत्पादन लक्ष्य दो हजार टन तक प्रत्येक दिन है ।

सूत्रों के मुताबिक 8 दिसंबर से इस ओसीपी खान को सीबीआई ने कोयला तस्करी मामले में बंद कर दिए थे। नॉर्थ सियार सोल ओसीपी को दो भागों में बाँटी गई है। उसमें से है 3 नंबर फजे को कनपुरिया एरिया महाप्रबंधक कार्यालय संचालित करती है। यहाँ मात्र 500 टन उत्पादन क्षमता है। दूसरी ओर आउटसोर्सिंग के तहत फेज 4 को ज्योति ट्रांसपोर्ट कंपनी चला रही है। अपने निजी ठेकेदारों के जरिए यहाँ से उत्पादन करवाती रही ,लेकिन इस ओसीपी से प्रत्येक दिन 70 टन कोयले की हेरा-फेरी अर्थात तस्करी करने का आरोप लगाते हुए इसे सीबीआई ने बंद कर दी थी। लगभग एक महीने के बाद इस खान को पुनः चलाने के लिए ज्योति ट्रांसपोर्ट को अनुमति दी गई है। हालांकि इस अनुमति के संदर्भ में किसी भी प्रकार का सूचना देने में प्रबंधन अपने को असमर्थ बताएं । लेकिन अभी से आरोप-प्रत्यारोप जारी है। सूत्रों का कहना है कि कोल इंडिया प्रबंधन खुली रूप से अवैध तरीके से खनन करना एवं तस्करी करने का मानव लाइसेंस दे दी है ।

कोल इंडिया ने 21.12 .2018 को एक सर्वेक्षण कर आदेश जारी किया था पत्रांक संख्या सी आई / सी 5बी जेबीसीसीआई / एच पी सी / भी डी ए /1093, इसमें यह कहा गया है कि 1 क्यूबिक टर्न यदि ओबी अर्थात मिट्टी पत्थर आदि को निकालने में ₹133 ,23 पैसे का खर्च लगना तय है। यदि कोयले का उत्पादन का खर्च ₹235 प्रति टन तक हो सकती है । ऐसी स्थिति में मात्र 43 रुपये वह भी अर्थात मित्र एवं ₹73 में कोयले का उत्पादन कैसे संभव हो सकता है ।

सूत्रों का कहना है कि सीबीआई इस बात पर ही जाँच पड़ताल कर रही है कि इतने कम लागत में यहाँ के ठेकेदार कर्मी किस प्रकार से कोयले का उत्पादन करती थी। जबकि कोल इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत चलने वाले बड़े-बड़े ओसीपी खान मैं 12 सो रुपए से लेकर ₹2000 तक का खर्च आमतौर पर आती है । अब तो इस अंचल के व्यवसायिक संगठन खुलेआम आरोप लगाते रहे हैं की यही वजह है कि अनेकों इस कारोबार से जुड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान इस धंधा से दूर हटने लगे हैं इतना ही नहीं अब तो जो पहले तक यहाँ काम करते रहे हैं वह भी अपना दूरी बनाने लगे हैं और ईसीएल जैसे प्रतिष्ठान में अपना टेंडर तक नहीं डालते हैं।

ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के पी आर व कौशिक गुप्ता ने सीधे तौर पर इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि इन सब मामलों में सीएमडी के सीक्रेट री नीलाद्री रॉय ही कुछ बोल पाएंगे लेकिन अब वह भी ऐसे मामले में जब से सीबीआई की छापामारी शुरू हुई है कुछ भी बोलने में असमर्थता जताते है।

Last updated: जनवरी 31st, 2021 by Raniganj correspondent
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