कुल्टी क्यों हुआ कलंकित

कुल्टी -हिंसा, झड़प, सांप्रदायिक विवाद आदि जैसे विषयो से अंजान रही कुल्टी क्षेत्र के बराकर ने काला धब्बा लगाने का कार्य किया है। कुल्टी क्षेत्र के इतिहास में आज तक सांप्रदायिक विवाद नहीं हुआ और ना ही कभी किसी ने स्वपन में भी ऐसी बात सोची होगी क्योंकि कुल्टी क्षेत्र में रहने वाले हर एक शख्स, चाहे वो जिस जाति, धर्म या वर्ग का हो, सभी एक साथ मिलकर एक दूसरे के पर्व-त्यौहार में शरीक होते रहे है। देश भर में कभी भी हुई कोई भी हिंसक घटनाएं इस क्षेत्र में कभी भी हावी नहीं हुई, हमेशा प्रेम और अमन कायम रहा है। लेकिन कुछ सड़े हुए दिमाग के स्वामियों ने इस परम्परा और ऐतिहासिक सद्भाव को नष्ट करने का जो कार्य किया है, वो कुल्टी वासियों के स्मरण में सदा के लिए जीवित रहेगा।

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों रामनवमी के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा एक जुलुस निकाली गई थी और इसी जुलुस को लेकर बराकर स्टेशन रोड में विवाद हो गया। हालांकि पुलिस एवं जिला प्रशासन और कुल्टी विधायक उज्जवल चटर्जी की सजगता और तत्परता से विवाद गंभीर मोड़ नहीं ले सका और मौका रहते इसे काबू में कर लिया गया। फिर इस विवाद ने लोगों के दिलो-दिमाग को झंकझोर दिया और कुल्टी वासियों को आश्चर्यचकित होना भी लाजमी था, क्योंकि ऐसा कभी यहाँ के लोगों ने ना ही देखा था और ना ही सुना और सोचा था। खैर मामला किसी तरह काबू में आ गया और दोनों तरफ के कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है एवं और लोगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी अभियान चला रही है।

इस घटना के बाबत स्थानीय लोगों से चर्चा करने पर एक बात सामने आई कि घटना का दोषी बाहरी और शरारती तत्व थे क्योंकि वाइरल वीडियो में जो लोग दिख रहे है वो सभी मुँह ढके हुए है और जिनका चेहरा दिख भी रहा है तो वे अनजान चेहरे है यानि उन्हें स्थानीय लोग पहचान नहीं रहे है। इसके अलावा एक गाना था, जो एक समुदाय को आहत कर रहा था।

पूर्व पार्षद पप्पू सिंह ने कहा कि गलती दोनों तरफ से हुई है, साथ ही यहाँ स्थानीय जिम्मेवार लोग और पुलिस प्रशासन की लापरवाही भी इस घटना का मूल कारणों में शामिल है। उन्होंने कहा कि एक विवादित गाना, जिसके कारण बार-बार विवाद हो रहा है तो प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के गाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए। साथ ही धार्मिक जुलूसों, चाहे किसी भी समुदाय की हो, उसे सड़क पर आने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे सभी का नुकसान होता है।

तुनु मुखर्जी ने कहा कि जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन बंगला नववर्ष था और इस विवाद के कारण हमलोगों के वर्षभर की ख़ुशी बर्बाद हो गई। पुलिस के उच्चाधिकारी ने बताया कि बाइक रैली की इजाजत नहीं दी गई थी, फिर इस तरह से प्रशासन के आदेश को नजरअंदाज कर बाइक रैली करना गलत है।

गौरतलब है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और यहाँ रहने वाले हर नागरिक को भारतीय संविधान यह अधिकार देता है कि वो अपनी जायज इच्छानुसार आजादी से जीवन यापन कर सकता है और किसी भी धर्म का अनुशरण कर सकता है। इसमें कोई पाबन्दी नहीं होगी। लेकिन प्रशासन को इस बात का भी ध्यान देना चाहिए कि किसी के कारण किसी व्यक्ति या समुदाय को धार्मिक आस्था पर ठेस ना पहुँचे।

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Last updated: अप्रैल 18th, 2019 by News Desk

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