मधाईपुर पैच से दो डंपर चोरी का कोयला पकड़ा गया, कईयों की भूमिका पर सवाल

ईसीएल के मधाईपुर पैच से आज चोरी के कोयले से लदे दो डंपर को पकड़ा गया और महाप्रबंधक अरुण कुमार झा के हस्तक्षेप से कोयले को जब्त करके लाउदोहा थाने को सौंपा गया । सबसे पहले सुरक्षा निरीक्षक उमेश भगत ने चोरी के कोयले से लदे डंपर को देखा और उसे रोकने की कोशिश की । परंतु कोयला चोर उमेश भगत के साथ मारपीट करने लगे। सुरक्षा प्रहरी देवकान्त महतो भी मौके पर पहुँचे और उनके साथ भी मार-पीट की गयी। फिर क्षेत्रीय अधिकारी शशिराज और सीआईएसएफ़ मौके पर पहुँचे और स्थिति को काबू में किया तब तक कोयला चोर फरार हो चुके थे और डंपर भी एक गड्ढे में फंस गयी थी। पूरी घटना की सूचना महाप्रबंधक अरुण कुमार झा को दी गयी । अरुण कुमार झा ने अन्य अधिकारियों की मदद से गड्ढे में फंसे डंपर से कोयला मशीन द्वारा खाली करवाकर डंपरों को लाउदोहा थाने भिजवाया। दोनों डंपरो में लगभग 40 टन से ज्यादा कोयला लदा था । अवैध ढंग से हो रही कोयला चोरी के खिलाफ महाप्रबंधक अरुण कुमार झा सभी कोलियरी डीजीएम की आपात बैठक बुलाई है और कोयला चोरी पर अंकुश लगाने की दिशा में कड़ी करवाई की बात कही है ।

क्या यह संभव है कि डिपो से दो डंपर कोयला अवैध रूप से लादे जाएँगे और किसी को पता नहीं चलेगा ?

गौरतलब है कि मधाईपुर पैच से कोयले की चोरी कोई नयी बात नहीं है। शाम को टेंडर के कोयलों का लदान जब बंद हो जाता है उसके बाद शुरू होता कोयला चोरी का खेल । आज जिस तरह से कोयले पकड़े गए वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इस पैच से पहले भी कोयले की चोरियाँ होती रही है और डिपो पर तैनात अधिकारियों , सुरक्षा कर्मियों एवं सीआईएसएफ़ की नाक के नीचे से दो डंपर कोयला चोरी कर लेना गंभीर सवाल खड़े करती ही । कोयला सुरक्षा की मुख्य जिम्मेवारी सीआईएसएफ़ की होती है जो डिपो पर ही तैनात रहते हैं और डिपो से ही कोयला की चोरी हुयी । सीआईएसएफ़ के अलावे डिपो पर निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहते हैं । उनके काँटा बाबू सहित कई अधिकारी की डिपो पर तैनाती रहती है। क्या यह संभव है कि जिस वक्त डंपर में कोयले को लड़ा जा रहा था तब किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी, यदि नहीं पड़ी तो यह भी सुरक्षा में चूक का गंभीर मामला है।

आज तक एक भी मामले में पुलिस मुख्य सूत्रधार तक नहीं पहुँच पायी है

पूरे पाण्डेश्वर सहित कोयलाञ्चल के सभी कोलियारियों से गाहे बगाहे कोयला चोरी की खबरें आती रहती है कई बार कोयले से लदे डंपर जब्त भी किए गए हैं लेकिन आज तक पुलिस मुख्य चोर तक नहीं पहुँच पायी है। सत्ता परिवर्तन के समय जो धार पकड़ हुयी थी और सारे कोयला माफिया या तो बंगाल छोड़ दिये या फिर भूमिगत हो गए । कुछ सलाखों के पीछे भी गए। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नन्द के नेतृत्व में कोयलाञ्चल से अवैध कोयला कारोबार का सफाया हो चुका था । लेकिन बीते तीन-चार वर्षों में एक भी मामला सामने नहीं आया जिसमें कि कोई अवैध कोयला कारोबारी गिरफ्तार हुआ हो जबकि इस बीच कई बार अवैध कोयले जब्त किए गए लेकिन पुलिस आज तक इसके सूत्रधार तक नहीं पहुँच पायी है।

ताजा मामले भी अवैध कोयले से लदे दो डंपरों को जब्त किया गया लेकिन इस बात की संभावना बिल्कुल कम है कि पुलिस मामले के तह तक जा पाएगी और मुख्य कोयला चोर पकड़ में आ पाएंगे साथ इसमें किसी सुरक्षाकर्मी, अधिकारी, पुलिस की भूमिका खंगाली जाएगी।

मंडे मॉर्निंग न्यूज़ नेटवर्क लगातार अवैध कोयला खनन एवं कोयला चोरी का मुद्दा उठाता रहा है।

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Last updated: नवम्बर 4th, 2018 by Central Desk - Monday Morning News Network

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