आसनसोल | पश्चिम बंगाल की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले आसनसोल के शिल्पांचल क्षेत्रों में इन दिनों चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। 2026 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच महिलाओं के बैंक खातों को लेकर जो ‘नकद युद्ध’ शुरू हुआ है, उसने राज्य की सियासत को दो ध्रुवों पर बाँट दिया है।
1. ममता का ‘मास्टरस्ट्रोक’: लक्ष्मी भंडार की राशि में ₹500 की वृद्धि
फरवरी 2026 के अंतरिम बजट के साथ ही राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ की राशि में ₹500 की बढ़ोतरी कर दी है।
सामान्य वर्ग: ₹1,000 से बढ़कर अब ₹1,500 प्रति माह।
SC/ST वर्ग: ₹1,200 से बढ़कर अब ₹1,700 प्रति माह।
आसनसोल के स्थानीय बाजारों में महिलाओं के बीच यह बढ़ी हुई राशि चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि यह सीधे उनके बैंक खातों में पहुँचनी शुरू हो गई है।
2. भाजपा का ‘अन्नपूर्णा’ कार्ड: ₹3,000 का वादा
इस नकद राजनीति के जवाब में भाजपा ने बंगाल की महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ का पासा फेंका है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यदि बंगाल में सत्ता परिवर्तन होता है, तो वे इस राशि को सीधे ₹3,000 कर देंगे। आसनसोल में जनसभाओं के दौरान भाजपा कार्यकर्ता इसे “सच्चा महिला सशक्तिकरण” बता रहे हैं।
3. ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ – सत्ता पक्ष का तीखा प्रहार
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस ₹3,000 के वादे को “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” करार दिया है। आसनसोल के स्थानीय टीएमसी नेताओं का तर्क है कि:
”भाजपा शासित राज्यों (जैसे बिहार या उत्तर प्रदेश) में महिलाओं को इतनी राशि क्यों नहीं मिल रही? बंगाल में ₹3,000 का वादा केवल चुनाव जीतने के लिए दिखाया गया एक काल्पनिक सपना है, जो चुनाव के बाद हवा हो जाएगा।”
4. तुलनात्मक दृष्टि: अन्य राज्यों की स्थिति
आसनसोल जैसे शहर में, जहाँ बिहार और दिल्ली के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां की तुलना भी अब आम चर्चा का हिस्सा है:
दिल्ली: जहाँ ₹1,000 से ₹2,100 के बीच की बात हो रही है।
बिहार: जहाँ मासिक नकद के बजाय ₹10,000 की शुरुआती सहायता और शिक्षा पर ₹50,000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
निष्कर्ष: भरोसा बनाम भविष्य का वादा
आसनसोल की गलियों में फिलहाल मुकाबला ‘भरोसे’ (जो हाथ में मिल रहा है) और ‘उम्मीद’ (जो वादा किया जा रहा है) के बीच है। महिलाओं के लिए ₹1,500 की जमीनी हकीकत बड़ी है या ₹3,000 का वह वादा जिसे विरोधी “मुंगेरीलाल का सपना” कह रहे हैं, इसका फैसला 2026 के मतपेटियों से ही निकलेगा।

