अंतरराज्यीय नदी जल साझेदारी विवादों के लिए एकल ट्रिब्यूनल

लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने देते हुए कहा कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने 16 फरवरी, 2018 और 18 मई, 2018 के अपने आदेशों के अनुसार दीवानी अपील संख्‍या 2007 के2453, 2007 के 2454, 2007 के 2456 में अंतिम निर्णय दे दिया है। यह अपील कावेरी जल विवाद ट्रिब्‍यूनल (सीबीडब्‍ल्‍यूटी) द्वारा किये गए जल आवंटन के खिलाफ तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल ने दर्ज कराई थी, जो अब 16 फरवरी, 2018 को दिए सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले में समाहित हो गया है। केन्‍द्र सरकार संतुष्‍ट है कि इस मामले में ट्रिब्‍यूनल की अब कोई जरूरत नहीं रह गई है।

इसलिए सीडब्ल्यूडीटी को अधिसूचना संख्‍या एस.ओ.3465 (ई) दिनांक 16 जुलाई, 2018 को भंग कर दिया गया है। संसद ने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (आईएसआरडब्ल्यूडी) अधिनियम, 1956 को अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटी के पानी से संबंधित विवादों पर फैसले के लिए अधिनियमित किया है। जब अंतर-राज्यीय नदियों पर किसी भी जल विवाद के संबंध में किसी भी राज्य सरकार से अधिनियम के तहत कोई अनुरोध प्राप्त होता है और जब वार्ता से जल विवाद नहीं सुलझाया जा सकता, तो केंद्र सरकार एक जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन करती है। वर्तमान में, 5 जल विवाद ट्रिब्यूनल सक्रिय हैं, जिनके विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं।

Last updated: अगस्त 9th, 2018 by Jahangir Alam

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