बड़ा खुलासा… नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से करोड़ो का गोरखधंधा -अमित

अवैध रूप से सरकारी चेक कैश कराया गया

झारखंड राज्य में भारत सरकार द्वारा संचालित नेहरु युवा केंद्र से करोड़ो की सरकारी राशि गबन करने वाले भ्रष्ट पदाधिकारियों का खुलासा युवा समाजसेवी सह आदर्श युवा संगठन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष अमित मोदक ने किया है. नेहरु युवा केंद्र हजारीबाग़ और चतरा जिला में राष्ट्रीय युवा स्वयं सेवक के पद पर कार्यरत करीब 60 युवक-युवतियों के खातों द्वारा अवैध रूप से युवा नेहरु केंद्र का सरकारी चेक कैश कराया गया है. यह गोरखधंधा 6 वर्षों से निर्बाध चल रहा है. जब स्वयं सेवक इसकी रिसीविंग मांगते है, तो अधिकारियों द्वारा उन्हें धमकी दी जाती है.

स्वयंसेवको के खाते का इस्तेमाल

उल्लेखनीय है कि हजारीबाग, टाटीझरिया के स्वयं सेवक सुनील कुमार (खाता संख्या-34333010115 एवं चेक संख्या 422746, 867324) सहित पाँच किस्तों में लगभग 1,65000 (एक लाख पैंसठ हजार) रुपये, शशि कुमार सिंह दारु प्रखंड खाता संख्या 43185822937 तथा चेक संख्या867325, 422732 सहित चार किस्तों में 1,05000 (एक लाख पाँच हजार) रुपये, दुष्यंत कुमार कटकमसांडी, खाता संख्या-33114843143 से95,000 (पंचानवे हजार) रुपये और ऐसे ही कई स्वयंसेवको के खाते का इस्तेमाल करते हुए अवैध तरीके से सरकारी राशि का गबन किया जा रहा है.

पुरुस्कार के राशि का भी बंदरबाँट

स्वयंसेवको ने इस सम्बन्ध में उपयुक्त को सूचित किया, लेकिन वहाँ से कोई कार्यवाही नहीं हुई. इससे सरकारी अधिकारियों की सांठ-गांठ होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है. जिन स्वयंसेवको ने इसका विरोध किया, उसे अधिकारियों द्वारा तत्काल नौकरी से हटा दिया गया. पूर्ण घोटाले में जो भी ट्रेनिंग होती थी, वो कागजी थी. यहाँ तक कि पुरुस्कार के राशि का भी बंदरबाँट किया गया. पौधरोपण और स्वच्छता से सबंधित कार्यक्रम के राशियों में भी घोटाले हुए है. राशि की निकासी पुराने स्वयं सेवको से भी करवाया गया.

ऐसा घोटाला प्रदेश के दर्जन भर जिलो में हुई है

अमित मोदक ने इस घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री (झारखण्ड), केंद्र सतर्कता आयोग एवं नेहरू युवा केंद्र के निदेशक को पत्र द्वारा जानकारी दी एवं सख्त कार्यवाही की मांग करते हुए आरोपियों द्वारा लुटे गए राशि की भरपाई करवाने का आग्रह किया. अमित मोदक के अनुसार इस प्रकार का घोटाला प्रदेश के दर्जन भर जिलो में हुई है. अमित मोदक ने कहा कि इसकी अधिक जानकारी के लिए सूचना का अधिकार के तहत आरटीआई किया गया है, जिसक जवाब मिलने की संभावना कम है.

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Last updated: नवम्बर 4th, 2018 by Jahangir Alam

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